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चोर चुस्त; चौकसी सुस्त: पटनावाले बाइक चोरों से परेशान, हर महीने 300 गाड़ियां हो रहीं गायब

Dainik Jagran - March 6, 2025 - 5:42pm

आशीष शुक्ल, पटना। एक गाड़ी खरीदने के लिए कितने महीने अपने खर्चे कम करने पड़ते हैं और साल-दर-साल ईएमआई भी भरनी पड़ती है। यह वाहन स्वामी से बेहतर कौन समझेगा, लेकिन चोरों के लिए यह इतने महीनों की मेहनत नहीं है। उनके लिए कुछ मिनट का समय ही काफी है।

वाहन चोरी की वजह से थानों में चक्कर लगाने वाले ऐसे पीड़ितों की संख्या दो-चार या दर्जन भर नहीं हैं, बल्कि हर महीने आंकड़ा तीन सौ के पार हो जाता है।

ऐसी स्थित तब है, जब जिले में सड़क से लेकर सीमावर्ती इलाके पहरेदारी, सुबह और शाम में वाहन जांच, कैमरे से निगरानी, गलियों में डायल 112 की टीम और सड़कों पर थाना पुलिस की चौकसी का दावा किया जा रहा है।

चौकसी ऐसी है कि वाहन चोर गिरोह जहां चाहते वहीं से वाहन चोरी कर भूमिगत हो जा रहे। लगातार बढ़ते मामलों के बाद भी पुलिस की कार्रवाई केस दर्ज करने से आगे नहीं बढ़ पा रही है।

यहां तक की सूचना पर अगर पुलिस घटनास्थल पहुंच भी गई तो दो चार जगह सीसीटीवी फुटेज देखकर आरोपितों की पहचान कर गिरफ्तारी का आश्वासन देते रहती है।

इधर, पुलिस की सुस्ती और उनके कमजोर नेटवर्क का फायदा उठाकर वाहन चोर गिरोह अपना दायरा बढ़ाने के साथ ही घटना को अंजाम देते रहते हैं।

इन इलाकों में सबसे अधिक वाहन चोरी

सबसे अधिक वाहन चोरी की शिकायतें कंकड़बाग, गांधी मैदान, कदमकुआं, अगमकुआं में आती हैं। कंकड़बाग, पत्रकारनगर से न्यू बाइपास और ओल्ड बाईपास से होते हुए फरार हो जाते हैं।

इसी तरह गांधी मैदान क्षेत्र में वाहन चोरी कर जेपी गंगा पथ से भाग जाते हैं। वाहन चोरों का गिरोह दीघा क्षेत्र में भी सक्रिय हुए है, जो जेपी गंगा पथ के आसपास से बाइक चोरी कर सीमा पार कर जाते हैं।

बाइक से करते थे शराब की होम डिलीवरी

दिसंबर 2024 में लोगों ने बाइक चोरी करते हुए एक बदमाश को दबोचकर पुलिस के हवाले कर दिया था। पूछताछ के बाद जक्कनपुर, चित्रगुप्त नगर, आलमगंज व दियारा रुस्तमपुर चार थानों की पुलिस ने वैशाली में दबिश देकर खेत और आसपास के इलाकों से चोरी की 11 बाइक बरामद की।

दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह बड़े स्तर पर शराब तस्करों को भी चोरी की बाइक को बेचता था।

इसी साल जनवरी में दानापुर, शाहपुर, खगौल और रूपसपुर थाने की संयुक्त टीम ने पतलापुर बाजार स्थित चार गैराज 60 बाइक जब्त की थी।

चोरी की बाइक का लूट, हत्या और रंगदारी में करते इस्तेमाल

कुछ माह पूर्व कंकड़बाग में रंगदारी नहीं देने पर फायरिंग की गई थी। फायरिंग में इस्तेमाल स्कूटी चोरी की थी। इसके पूर्व पटना सिटी में एक युवक की घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई।

अपराधियों की गिरफ्तारी हुई। वारदात में इस्तेमाल बाइक को भी बरामद किया गया। अपराधियों ने घटना को अंजाम देने के लिए उक्त बाइक को जक्कनपुर क्षेत्र से लूटा था।

घर-बाजार के पास से पांच मिनट में बाइक उड़ा दे रहे हैं शातिर
  • 18 फरवरी : रात में गांधी मैदान थाना क्षेत्र के सालिमपुर अहरा में स्कूटी चोरी कर ली गई
  • 18 फरवरी : लोदीपुर में बाइक गायब कर दी गई
  • 21 फरवरी : बिरला मंदिर रोड साईं मंदिर गली के पास से बाइक चोरी हो गई
  • 21 फरवरी : एनआइटी घाट के पास से चोरों ने बाइक गायब कर दी
  • 22 फरवरी : पीरबहोर में पिलर संख्या 29-30 के पास बाइक खड़ी कर युवक कुछ सामान खरीदने गए थे। पांच मिनट बाद लौटकर आए तो बाइक चोरी हो चुकी थी
  • 24 फरवरी : महेंद्रू रेलवे कार्यालय के मुख्य गेट से पांच मिनट में बाइक चोरी कर ली गई
  • 25 फरवरी : रात पीएमसीएच के शिशु वार्ड के पीछे से बाइक चोरी कर ली गई
कड़ी कार्रवाई कर रही पुलिस

हाल के दिनों में गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी और वाहन भी बरामद किए गए हैं। थाना पुलिस को जैसे ही वाहन चोरी की सूचना मिलती है, तत्काल इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) को सूचित करते हुए वाहन नंबर उपलब्ध कराना है। वहीं, वाहन के नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। -अवकाश कुमार, एसएसपी

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कृषि, ऑटोमोबाइल, जेम्स-ज्वैलरी, फार्मा में शुल्क का अंतर ज्यादा, रेसिप्रोकल टैरिफ लगा तो इन पर होगा ज्यादा असर

Dainik Jagran - National - March 6, 2025 - 5:35pm

एस.के. सिंह, नई दिल्ली।

मंगलवार, 4 मार्च को अमेरिकी संसद को अपने पहले संबोधन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल यानी जवाबी टैरिफ की बात दोहराई। एक बार फिर भारत का नाम लेकर उन्होंने कहा कि भारत अमेरिकी मोटरसाइकिलों पर 100% तक टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाता है। ट्रंप प्रशासन 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करेगा। ट्रंप का कहना है कि साझीदार देश या तो हमारे बराबर आयात शुल्क लगाएं, वर्ना हम उनके बराबर शुल्क लगाएंगे। भारत-अमेरिका व्यापार में सेक्टर के हिसाब से देखें तो कृषि क्षेत्र में टैरिफ का अंतर सबसे ज्यादा है। इसके बाद ऑटोमोबाइल, जेम्स-ज्वैलरी, केमिकल तथा फार्मा उत्पाद हैं। रेसिप्रोकल कदम उठाते हुए अमेरिका ने इन पर टैरिफ बढ़ाया तो निर्यात ज्यादा प्रभावित हो सकता है। प्रमुख सेक्टर में सिर्फ खनिज और पेट्रोलियम ऐसे हैं जिन पर भारत से ज्यादा अमेरिका में टैरिफ है।

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्हाइट हाउस में मुलाकात से कुछ घंटे पहले ट्रंप ने ‘फेयर एंड रेसिप्रोकल प्लान’ की घोषणा की थी। ट्रंप ने स्टील और एल्युमिनियम पर भी 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है जो संभवतः 12 मार्च से लागू होगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अभी अमेरिका यात्रा पर हैं। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक के साथ उनकी मुलाकात हुई है और दूसरे अधिकारियों के साथ भी बैठक तय है। उम्मीद है कि इन बैठकों के सकारात्मक नतीजे निकलेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। यह तय हुआ था कि अगले सात-आठ महीने में इस समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा। लेकिन ट्रंप ने 2 अप्रैल से ही रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने की बात कही है। ऐसा हुआ तो अमेरिका को भारतीय निर्यात महंगा हो जाएगा।

ट्रंप चीन से आयात पर 20% और कनाडा तथा मेक्सिको पर 25% शुल्क लगा चुके हैं। चीन से जेम्स-ज्वैलरी, स्मार्टफोन आदि के आयात पर टैरिफ बढ़ने का भारत को फायदा मिल सकता है, लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि ट्रंप भारत के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ लगाते हैं या नहीं।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रेसिप्रोकल टैरिफ सभी सेक्टर के औसत के हिसाब से लागू होगा या हर सेक्टर के लिए अलग रहेगा। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) ने अमेरिका के ट्रेड डेटा के आधार पर बताया है कि अगर अमेरिका देश स्तर पर एक टैरिफ लगाता है तो भारत पर अतिरिक्त 4.9% टैरिफ लगेगा। अभी भारत में अमेरिकी वस्तुओं पर औसत टैरिफ 7.7% है, जबकि अमेरिका में भारतीय वस्तुओं के आयात पर औसत टैरिफ 2.8% है। इस तरह 4.9% का अंतर है।

कृषि और औद्योगिक वस्तुओं को अलग-अलग देखें तो भारत से कृषि निर्यात पर अमेरिका में औसतन 5.3% टैरिफ है जबकि भारत में अमेरिकी कृषि वस्तुओं पर औसत टैरिफ 37.7% है। यानी भारत 32.4% अधिक टैरिफ लगाता है। जहां तक औद्योगिक वस्तुओं की बात है तो भारत का औसत टैरिफ 5.9% और अमेरिका का 2.6% है। इसमें 3.3% का अंतर है।

रेसिप्रोकल टैरिफ पर ट्रंप के प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम में कहा गया है कि अमेरिका अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में आयात पर कम शुल्क लगाता है, लेकिन इसके साझीदार देश अमेरिका से आयात पर अधिक शुल्क लगाते हैं। अमेरिकी उत्पादों को अनुचित और भेदभाव वाली बाधाओं (जैसे वैट) का भी सामना करना पड़ता है। इस कारण अमेरिका का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। इसे रेसिप्रोकल टैरिफ से सुधारा जा सकता है।

भारत का जिक्र करते हुए इसमें कहा गया है कि भारत में कृषि उत्पादों पर औसत टैरिफ 39% है, जबकि उन्हीं उत्पादों पर अमेरिका का औसत आयात शुल्क केवल 5% है। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत मोटरसाइकिलों पर 100% आयात शुल्क लगाता है, जबकि भारतीय मोटरसाइकिलों पर अमेरिका का आयात शुल्क केवल 2.4% है।

हालांकि ट्रंप के आंकड़ों पर विशेषज्ञ अक्सर संदेह जताते हैं। पिछले बजट (2025-26) में ही 1600 सीसी से कम इंजन क्षमता वाले मोटरसाइकिल पर आयात शुल्क 50% से घटाकर 40% और 1600 सीसी से अधिक क्षमता वाले मोटरसाइकिल पर 50% से घटाकर 30% कर दिया गया है।

किस सेक्टर में टैरिफ का अंतर कितना

GTRI के अनुसार, कृषि में प्रोडक्ट के हिसाब से देखा जाए तो मांस, मछली और प्रोसेस्ड सीफूड का निर्यात ज्यादा प्रभावित होगा। वर्ष 2024 में भारत ने अमेरिका को इनका 2.58 अरब डॉलर का निर्यात किया। अमेरिका इन पर सिर्फ 0.59% टैरिफ लगाता है जबकि भारत में यह 28.42% है। रेसिप्रोकल टैरिफ की स्थिति में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 27.83% बढ़ जाएगा। स्नैक्स और कनफेक्शनरी जैसे प्रोसेस्ड फूड, कोकोआ और चीनी पर टैरिफ में अंतर 24.99% है। अनाज, फल-सब्जियां, मसालों में यह अंतर 5.72%, डेयरी प्रोडक्ट पर 38.23% और खाद्य तेलों में 10.67% का है।

औद्योगिक वस्तुओं में फार्मास्यूटिकल्स का निर्यात प्रभावित होगा क्योंकि इन पर टैरिफ 10.90% बढ़ जाएगा। पिछले साल इनका 12.72 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है। जेम्स-ज्वैलरी में टैरिफ अंतर 13.32% और इलेक्ट्रिकल, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स में 7.24% का है। टैरिफ इतना बढ़ने पर आईफोन के निर्यात पर असर हो सकता है। ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स में यह अंतर 23.10%, मशीनरी और कंप्यूटर में 5.29%, केमिकल में 6.05%, टेक्सटाइल में 6.59%, रबर उत्पादों में 7.76%, सेरामिक और ग्लास में 8.27% तथा फुटवियर में 15.56% का है। मिनरल, पेट्रोलियम तथा गारमेंट में टैरिफ का अंतर भारत के पक्ष में है।

रेसिप्रोकल टैरिफ भारत के लिए ज्यादा मुश्किल वाला

ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंक नेटिक्सिस की चीफ इकोनॉमिस्ट (एशिया प्रशांत) एलिसिया गार्सिया हेरेरो जागरण प्राइम से कहती हैं, “भारत के लिए स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ से ज्यादा महत्वपूर्ण है अमेरिका का रेसिप्रोकल टैरिफ। भारत ने अमेरिका से आयात होने वाली वस्तुओं पर काफी टैरिफ लगा रखा है। अगर ट्रंप भी जवाबी टैरिफ लगाते हैं तो उससे भारत के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी।”

जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी में विशिष्ट विजिटिंग प्रोफेसर अजय छिब्बर ट्रेड वेटेड टैरिफ की बात कहते हैं, “अमेरिका का ट्रेड वेटेड टैरिफ 2.2%, जापान का 1.7%, ईयू का 2.7%, चीन का 3%, कनाडा का 3.4%, मेक्सिको का 3.9%, वियतनाम का 5%, ब्राजील का 6.7%, दक्षिण कोरिया का 8.4% और भारत का 12% है।” इस लिहाज से देखें तो भारत का टैरिफ अमेरिका का पांच गुना है।

कृषि को वार्ता से बाहर रखने की जरूरत

भारत के ज्यादातर किसान छोटी जोत वाले हैं जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनका मुकाबला बहुराष्ट्रीय कंपनियों से है। भारत अभी तक कृषि को किसी भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते से बाहर रखने में सफल रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बैठक के बाद जारी साझा बयान में कहा गया है कि ‘दोनों देश कृषि वस्तुओं का व्यापार बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे।’ ट्रंप अगर कृषि में रेसिप्रोकल टैरिफ के लिए दबाव डालते हैं तो ऐसी हालत में या तो भारत को कृषि उत्पादों पर अपना टैरिफ अमेरिका के बराबर लाना होगा, या फिर भारत से आयात करने वाले कृषि उत्पादों पर अमेरिका ऊंचे टैरिफ लगाएगा।

अमेरिका की एग्री-बिजनेस कंपनियां सरकारी सब्सिडी के कारण वैश्विक कृषि बाजार पर हावी रही हैं। अमेरिका की कृषि सब्सिडी डब्लूटीओ के अस्तित्व में आने वाले साल 1995 के 61 अरब डॉलर से बढ़कर 2022 में 217 अरब डॉलर हो गई। अमेरिकी कृषि विभाग की 2019 की एक रिपोर्ट में अमेरिका के कृषि निर्यात और कृषि सब्सिडी के संबंधों का अध्ययन किया गया है। इसके अनुसार कृषि सब्सिडी एक प्रतिशत घटाने पर कृषि निर्यात हर साल 0.40% कम हो जाएगा। अगर कृषि सब्सिडी पूरी तरह खत्म कर दी जाए तो अमेरिका के कृषि निर्यात में हर साल 15.3 अरब डॉलर की गिरावट आने लगेगी।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सरकार किसानों की मदद के लिए 60 से ज्यादा कार्यक्रम चलाती है। इसमें सबसे बड़ा फसल बीमा है। सरकार 100 से ज्यादा फसलों के लिए बीमा पर सब्सिडी देती है। गेहूं, मक्का, कपास और सोयाबीन मुख्य फसलें हैं। लगभग 80% बीमा किसानों की आय सुरक्षित करने के लिए और 20% पैदावार में कमी के लिए है।

भारत के लिए क्या करना उचित

इंडियन सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू कहते हैं, “हमें एक बेहतर स्ट्रक्चर वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते की उम्मीद है। इस समझौते में स्मार्टफोन, हियरेबल और वियरेबल, कलर टेलीविजन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स तथा अप्लायंसेज, लाइटिंग जैसे प्रोडक्ट पर जीरो ड्यूटी ऑफर करना हमारे लिए नया नहीं होगा। जापान, दक्षिण कोरिया और आसियान (वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया आदि) के साथ मुक्त व्यापार समझौते में हम पहले ही ऐसा कर रहे हैं।” उनका कहना है कि सावधानीपूर्वक आगे बढ़ने का दीर्घकालिक असर यह होगा कि अभी हम अमेरिका को जो 10 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात कर रहे हैं, वह 2030 तक 800% बढ़कर 80 अरब डॉलर हो सकता है।

अजय छिब्बर के अनुसार, “भारत द्विपक्षीय व्यापार वार्ता की तैयारी कर रहा है। हालांकि यह आसान नहीं होगा, खास कर कृषि उत्पादों के लिए। कृषि पर भारत का ट्रेड-वेटेड टैरिफ 65% जबकि अमेरिका का सिर्फ 4% है। अगर अमेरिका नॉन-टैरिफ बाधाओं का मुद्दा भी उठाता है, जैसा कि ट्रंप कह चुके हैं, तो भारत के लिए सौदा करना और जटिल होगा।” वे यह भी कहते हैं कि अमेरिका के साथ विवाद के बाद ईयू और इंग्लैंड दोनों भारत के साथ वर्षों से रुकी ट्रेड डील को अंतिम रूप देना चाहते हैं।

GTRI के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) कितना मददगार होगा यह कोई नहीं जानता। ट्रंप ने खुद 2019 में मेक्सिको और कनाडा के साथ यह समझौता किया था, इसके बावजूद दोनों देशों पर 25% टैरिफ लगा दिया है। ट्रंप भारत पर भी सरकारी खरीद को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने, कृषि सब्सिडी घटाने, पेटेंट सुरक्षा कम करने और डेटा पर अंकुश खत्म करने का दबाव डाल सकते हैं। भारत अभी तक इनसे इनकार करता रहा है। एफटीए को अंतिम रूप देने में समय लग सकता है और तब तक ट्रंप रेसिप्रोकल टैरिफ लगा सकते हैं।

भारत को ऐसी वस्तुओं की पहचान करनी चाहिए जिनके आयात पर शुल्क कम करने से घरेलू इंडस्ट्री प्रभावित नहीं होगी। कृषि को इससे बाहर रखा जा सकता है। भारत को अपना प्रस्ताव अप्रैल से पहले भेजना होगा और अमेरिका के साथ सहमति भी बनानी होगी। तभी भारत रेसिप्रोकल टैरिफ से बच सकता है।

इसका कहना है कि द्विपक्षीय बातचीत में उन प्रोडक्ट का भी ध्यान रखना चाहिए जिनमें भारत में वैल्यू एडिशन बहुत कम होता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका में 1000 डॉलर रिटेल कीमत वाला आईफोन भारत से 500 डॉलर में निर्यात होता है। भारत को सिर्फ 30 डॉलर मिलते हैं। कंपोनेंट सप्लायर को 450 डॉलर मिलते हैं, एप्पल लाइसेंसिंग और अन्य फीस के तौर पर 450 डॉलर लेती है और अमेरिकी रिटेलर 50 डॉलर लेते हैं। इस तरह देखें तो भारत से अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात में से भारत की वास्तविक आय महज 3.36 करोड़ डॉलर है। पीएलआई और अन्य इन्सेंटिव को भी जोड़ें तो वास्तविक आय नहीं के बराबर है। यही स्थिति सोलर पैनल, हीरे, पेट्रोकेमिकल और अन्य कई प्रोडक्ट में है जहां भारत में वैल्यू एडिशन 10% से भी कम है। आईफोन जैसे निर्यात से भारत की इकोनॉमी को खास लाभ नहीं होता।

जीटीआरआई के मुताबिक, उद्योगों को यह आकलन करना पड़ेगा कि रेसिप्रोकल टैरिफ का उनके उत्पादों पर क्या असर पड़ेगा और इस टैरिफ के बाद अमेरिकी बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धी क्षमता कितनी रहेगी। ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल और टेक्सटाइल सेक्टर में टैरिफ का अंतर अधिक है। इसलिए अमेरिकी बाजार में इनके दाम अधिक बढ़ेंगे। प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए कंपनियों को लागत घटाने के तरीके तलाशने होंगे। इसके अलावा यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया तथा अफ्रीका के नए बाजारों में भी संभावनाएं तलाशनी पड़ेंगी जहां टैरिफ तुलनात्मक रूप से कम होगा। अमेरिकी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित करना भी उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। उद्योग संगठनों को एमएसएमई को टैरिफ में होने वाले इन बदलावों के बारे में समझने में मदद करनी चाहिए। इसके लिए ट्रेनिंग सेशन, जागरूकता कार्यक्रम और ट्रेड कंसल्टेशन की सुविधा दी जा सकती है।

ट्रंप के कदमों से कई देशों में मंदी का डर

ट्रंप प्रशासन ने चीन पर 20% तथा कनाडा और मेक्सिको पर 25% टैरिफ लगाया है। हालांकि कनाडा से तेल, गैस और बिजली आयात पर 10% टैरिफ है। कनाडा से लगा अमेरिका का उत्तर पूर्वी और मध्य पश्चिम इलाका वहां से आने वाली बिजली पर ही निर्भर है। ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी राहत देते हुए एक महीने के लिए टैरिफ से छूट दी गई है।

ये तीनों देश अमेरिका के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर हैं। अमेरिका ने पिछले साल मेक्सिको, कनाडा और चीन के साथ 2.2 लाख करोड़ डॉलर का व्यापार किया था। मेक्सिको के साथ सबसे अधिक 840 अरब डॉलर, कनाडा के साथ 762 अरब डॉलर और चीन के साथ 582 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ।

कनाडा ने जवाबी कदम उठाते हुए अमेरिका से 107 अरब डॉलर के आयात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसमें से 21 अरब डॉलर के आयात पर टैरिफ तत्काल लागू हो गया है, बाकी पर तीन हफ्ते में लागू किया जाएगा। माना जा रहा है कि ऐसा करके कनाडा ने बातचीत का संकेत दिया है।

अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की अर्थव्यवस्थाएं अनेक मामलों में एक दूसरे पर निर्भर हैं। खासकर कार, मशीनरी, पेट्रोलियम और कृषि उत्पादों के मामले में। उदाहरण के लिए अमेरिका में कोई कार बिक्री के लिए तैयार होने से पहले उसके कंपोनेंट कई बार सीमा पार करते हैं। इन पर शुल्क लगाने से कारों के दाम काफी बढ़ जाने के आसार हैं।

कनाडा और मेक्सिको पर फरवरी में ही आयात शुल्क लगाया जाना था, लेकिन ट्रंप ने ड्रग्स और अवैध प्रवासियों पर नियंत्रण के लिए 30 दिन की मोहलत दी थी। दोनों देशों ने इस दिशा में कदम उठाने के दावे किए, इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ने उन पर टैरिफ लगाया है। ट्रंप का यह भी कहना है कि व्यापार संतुलन कम होने पर ही वे टैरिफ घटाएंगे। इसमें अभी समय लग सकता है। इससे पहले कनाडा और मेक्सिको अमेरिका के साथ लगभग शून्य टैरिफ पर कारोबार कर रहे थे। इसके लिए समझौता ट्रंप के ही पहले कार्यकाल में हुआ था।

मॉर्गन स्टैनले का अनुमान है कि चीन, मैक्सिको और कनाडा पर नए टैरिफ से आने वाली तिमाहियों में अमेरिका की आर्थिक विकास दर 0.7% से 1.1% कम हो जाएगी। कनाडा की ग्रोथ पर 2.2% से 2.8% का असर होगा और मेक्सिको मंदी में चला जाएगा। कनाडा चैंबर ऑफ कॉमर्स के सीईओ कैंडेस लैंग ने कहा है कि अमेरिका की टैरिफ नीति कनाडा को मंदी, बेरोजगारी और आर्थिक तबाही की ओर धकेल रही है। यूरोपीय फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप एसईबी के अर्थशास्त्री मारकस वाइडेन ने कहा है कि अब डिक्शनरी में एक नया शब्द जोड़ने का समय आ गया है और वह शब्द है ट्रंप-सेशन (Trumpcession), अर्थात 'ट्रंप की वजह से आने वाली मंदी।

चीन ने अमेरिका के कृषि उत्पादों को बनाया निशाना

चीन पर 20% टैरिफ के दायरे में स्मार्टफोन, लैपटॉप, वीडियो गेम कंसोल, स्मार्ट वॉच, स्पीकर और ब्लूटूथ डिवाइस जैसे कंज्यूमर प्रोडक्ट भी आएंगे जो अभी तक इससे बाहर थे। जवाबी कार्रवाई करते हुए चीन ने अमेरिका से लगभग 21 अरब डॉलर के कृषि तथा खाद्य उत्पादों के आयात पर 15% तक टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका से चिकन, गेहूं, मक्का और कपास पर 15% अतिरिक्त आयात शुल्क लगेगा। ज्वार, सोयाबीन, पोर्क, बीफ, सीफूड, फल, सब्जियां और डेयरी प्रोडक्ट पर शुल्क में 10% की बढ़ोतरी की गई है।

चीन के टैरिफ 10 मार्च से लागू होंगे, हालांकि जिन कंपनियों का माल रास्ते में है उन्हें 12 अप्रैल तक की छूट होगी। चीन ने 25 अमेरिकी कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत निर्यात और निवेश पर अंकुश वाली सूची में डाल दिया है। इनमें से 10 कंपनियां ताइवान को हथियार बेच रही थीं।

वर्ष 2024 में अमेरिका ने 176 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का निर्यात किया था। अमेरिका के कृषि उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार मेक्सिको है। उसके बाद कनाडा और चीन हैं। अमेरिका ने पिछले साल 14% यानी 24.7 अरब डॉलर का कृषि निर्यात चीन को किया। लेकिन चीन कृषि उत्पादों के मामले में अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। वह ब्राजील और अर्जेंटीना से बड़ी मात्रा में सोयाबीन खरीदने लगा है।

चीन पर लगाया गया 20% टैरिफ ट्रंप के पहले कार्यकाल के टैरिफ के अतिरिक्त है। पहले कार्यकाल में ट्रंप ने चीन से विभिन्न वस्तुओं के लगभग 370 अरब डॉलर के आयात पर 25% तक शुल्क लगाया था। बाइडेन प्रशासन ने कुछ वस्तुओं पर टैरिफ में और वृद्धि की। जैसे चीन से सेमीकंडक्टर आयात पर टैरिफ दोगुना कर 50% कर दिया। चाइनीज इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ 100% कर दिया गया था।

अमेरिकी टॉय एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ग्रेग अहर्न ने कहा है कि चीन से आयात पर 20% टैरिफ खिलौना उद्योग के लिए नुकसानदायक है, क्योंकि अमेरिका में बिकने वाले करीब 80% खिलौने चीन में ही बने होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप ने चुनाव प्रचार में चीन पर 60% टैरिफ लगाने की बात कही थी। अभी 20% टैरिफ लगा है और इतने से कोई भी कंपनी चीन से अपना सप्लाई चेन बाहर नहीं ले जाएगी। टैरिफ 35% होने पर कंपनियां दूसरे विकल्पों पर विचार करना शुरू करेंगी।

यह संभावना भी कम है कि अमेरिकी कंपनियां 25% टैरिफ के बाद वहां एल्युमिनियम या स्टील प्लांट लगाएंगी। अमेरिका में मजदूरी और बिजली दोनों महंगी होने से इतने टैरिफ के बाद भी इनका आयात करना ही सस्ता पड़ेगा। इसके अलावा इस तरह के निवेश दीर्घकाल को ध्यान में रखकर किए जाते हैं, जबकि ट्रंप सिर्फ चार साल के लिए हैं।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि रेसिप्रोकल टैरिफ से महंगाई उतनी नहीं बढ़ेगी जितना विभिन्न अर्थशास्त्री दावा कर रहे हैं। इसके विपरीत टैरिफ से विदेशी कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्री खोलने के लिए प्रेरित होंगी। ट्रंप ने कहा है कि ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी अमेरिका में 100 अरब डॉलर निवेश करने पर राजी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के निवेश और फैक्ट्री खड़ी करने में समय लगेगा। स्किल्ड कर्मचारियों की उपलब्धता का भी सवाल है।

छिब्बर कहते हैं, “ट्रंप ने भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपियन यूनियन जैसे प्रमुख व्यापार साझीदार देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। 1930 में इसी तरह लागू किए गए स्मूट-हॉली टैरिफ के बाद ग्लोबल ट्रेड वॉर छिड़ी और भीषण मंदी आई थी।”

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Ranya Rao Arrest: कितनी बार गईं दुबई? गिरफ्तार रान्या राव बचने के लिए ऐसे देती थी सिक्योरिटी को चकमा

Dainik Jagran - National - March 6, 2025 - 5:18pm

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कर्नाटक के आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव की बिटिया और कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव सोना तस्करी का आरोप में पकड़ी गई है। रान्या को सोने की तस्करी करते हुए बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों ने ये कार्रवाई की है।

14.8 किलो सोना जब्त

रान्या की गिरफ्तारी के बाद उसके बेंगलुरु में स्थित फ्लैस पर छापेमारी की गई। फ्लैट से करोड़ों रुपये की नकदी और सोना जब्त किया गया। डीआरआई के अधिकारियों ने रान्या को एयरपोर्ट पर 14.8 किलोग्राम सोने की तस्करी करते हुए उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वह सोमवार रात दुबई से अमीरात की उड़ान से बेंगलुरु पहुंचीं। उसके पास से जब्त की गई सोने की छड़ों की कीमत 12.56 करोड़ रुपये है। रान्या लगातार दुबई की यात्रा कर रही थी। इस कारण डीआरआई अधिकारी अभिनेत्री की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

फ्लैट से करोड़ों का माल जब्त

डीआरआई अधिकारियों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम सोना हाल के दिनों में बेंगलुरु हवाई अड्डे पर सबसे बड़ी जब्ती में से एक है। रान्या की गिरफ्तारी के बाद अधिकारियों ने बुधवार को बेंगलुरु के लावेल रोड स्थित उसके फ्लैट पर छापे मारे, जहां वह अपने पति के साथ रहती हैं। तलाशी में 2.06 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण और 2.67 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई। वहां उसने कथित तौर पर किराये के रूप में 4.5 लाख रुपये का भुगतान किया था। मामले में अब तक 17.29 करोड़ रुपये की जब्ती की गई है।

IPS अधिकारी की सौतेली बेटी

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि रान्या वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रामचंद्र राव की सौतेली बेटी है। रामचंद्र राव ने पहली पत्नी की मृत्यु के बाद एक महिला से शादी की थी जिसकी पहली शादी से दो बेटियां हैं। रान्या उनमें से एक है।

रामचंद्र डीजीपी रैंक के अधिकारी हैं और इस समय कर्नाटक राज्य पुलिस आवास और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। हालांकि, रामचंद्र राव ने यह कहते हुए खुद को उससे दूर कर लिया है कि चार महीने पहले उसकी शादी के बाद से वे संपर्क में नहीं हैं।

15 दिनों में चार बार की दुबई यात्रा

सूत्रों ने बताया कि पिछले 15 दिनों में रान्या के चार बार दुबई जाने और बेंगलुरु लौटने के बाद डीआरआई ने अभिनेत्री के बारे में जानकारी जुटाई। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि खुफिया जानकारी के बाद डीआरआई ने बेंगलुरु के केंपेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर 12.56 करोड़ रुपये मूल्य की सोने की छड़ें ले जा रही 33 साल की रान्या को रोका। वह तीन मार्च को अमीरात की उड़ान से दुबई से बेंगलुरु पहुंची थी। जांच करने पर 14.2 किलोग्राम वजन की सोने की छड़ें मिलीं जिसे उसने अपने शरीर में छिपा रखा था।

  • संदेह से बचने के लिए अपने डीजीपी पिता के नाम का इस्तेमाल किया
  • अपनी बेल्ट और कपड़ों में छिपाकर सोने की तस्करी करती थी।
  • पिक-अप के लिए पुलिसकर्मियों को बुलाती थी, जो फिर उसे घर ले जाते थे।
  • जांच की जा रही है कि क्या उससे जुड़ा कोई पुलिसकर्मी सोने की तस्करी में शामिल था।
  • रान्या के साथ आए दो लोग ब्रीफकेस में तस्करी का सोना ले जा रहे थे।
  • रान्या ने सुरक्षा जांच लगभग पूरी कर ली थी और बाहर निकलने ही वाली थी। डीआरआई टीम ने उसे रोककर तलाशी ली।

न्यायिक हिरासत में भेजा गया

रान्या को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया। उसे मंगलवार को विशेष अदालत में पेश किया गया। जज ने उसे 18 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। रान्या ने फिल्म ''माणिक्य'' में कन्नड़ सुपरस्टार सुदीप के खिलाफ मुख्य अभिनेत्री के रूप में काम किया है। उन्होंने अन्य दक्षिण भारतीय भाषा की फिल्मों में भी अभिनय किया है।

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