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अमेरिका के टैरिफ से घुटनों पर आया ड्रैगन! अब भारत में इंवेस्ट करेंगी चीनी कंपनियां, मानसरोवर यात्रा पर होगा बड़ा एलान
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच कारोबारी युद्ध तेज हो गया है। ऐसे में भारत समेत अन्य पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर भी ड्रैगन के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चीन सरकार ने इस साल एक जनवरी से नौ अप्रैल, 2025 तक ना सिर्फ 85 हजार भारतीयों को वीजा दिया है, बल्कि और ज्यादा भारतीयों को चीन भ्रमण के लिए अपने वीजा नियमों को आकर्षित बनाने की भी घोषणा की है।
यही नहीं द्विपक्षीय वार्ताओं में भारतीय अधिकारियों को चीन ने यह संकेत भी दिया है कि वह दोनों देशों की राजधानियों के बीच जल्द से जल्द हवाई संपर्क स्थापित करने को इच्छुक है और इस बारे में भारतीय एजेंसियों को तेजी दिखानी चाहिए। इसी वर्ष से मानसरोवर यात्रा की शुरुआत तक करने की पूर्व में बनी सहमति को भी अगले एक-दो दिनों के भीतर ही लागू करने को लेकर घोषणा किये जाने की तैयारी है।
भारत से एक्सपोर्ट करेंगी चीनी कंपनियांइसी बीच बुधवार को चीन की स्मार्ट फोन निर्माता कंपनी रीयलमी ने भारत की इलेक्ट्रोनिक निर्माता कंपनी ऑप्टीमस इलेक्ट्रोनिक्स के साथ मिलकर आर्टिफिशिएल इंटेलीजेंस ऑथ थग्स (एआईओटी) भारत में उत्पाद बनाने और भारत को अपने उत्पादों के लिए एक प्रमुख निर्यात स्त्रोत स्थल के तौर पर स्थापित करने की घोषणा की है।
चीन की कुछ मोबाइल निर्माता कंपनियां पहले से ही यहां एसेंबलिंग करने लगी हैं लेकिन यह पहला मौका है, जब चीन की किसी कंपनी ने भारत को अपने उत्पादों के निर्माण व वैश्विक निर्यात स्थल के तौर पर चिन्हित करने का फैसला है। रीयलमी और ऑप्टीमस ने कहा है कि वह भारत में सालाना 50 लाख उत्पादों (स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, टैब्स आदि) का निर्माण करेंगी और दो हजार लोगों को रोजगार देंगी।
भारतीयों को आसानी से मिल रहा वीजा- बाजार के सूत्रों का कहना है कि चीन की शिओमी और ओप्पो जैसी दूसरी कंपनियां भी भारत में अपने मैन्यूफैक्चरिंग बेस को ज्यादा विस्तार करने की तैयारियों में हैं। बहरहाल, चीन की कंपनियों की इन तैयारियों से भारत सरकार की मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बल मिलना तय है।
- सूत्रों ने बताया है कि चीन सरकार ने भारत स्थित अपने दूतावास की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ानी शुरू कर दी है। अब भारतीय नागरिकों के लिए वीजा लेने की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया है। चीनी दूतावास से साक्षात्कार के लिए पहले से आवेदन लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। वीजा फीस में भी कटौती की गई है।
- चीन सरकार की तरफ से यह सकारात्मक कदम तब उठाया गया है, जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने की लगातार कोशिश हो रही है। वर्ष 2020 से पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों के घुसपैठ से उत्पन्न हुई स्थिति को समाप्त करने के लिए अक्टूबर, 2024 में पीएम नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बैठक में बनी सहमति को धीरे-धीरे करके लागू किया जा रहा है। इसमें मानसरोवर यात्रा को शुरू करने और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सेवा की शुरुआत करने पर भी काम हो रहा है।
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Bihar: चुनावी चौसर पर दांव आजमाने आए नए मोहरे, PK और RCP के बाद शिवदीप लांडे और IP गुप्ता की एंट्री
विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। विधानसभा के पिछले दो चुनावों की परिस्थिति एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न थी। अलबत्ता एक समानता तटस्थ मतदाताओं को लेकर रही, जो आमने-सामने के दोनों गठबंधनों से इतर तीसरे विकल्प की तलाश में थे। उनकी संख्या 20-25 प्रतिशत रही है।
उन्हीं एक चौथाई मतदाताओं के बूते चुनावी चौसर पर इस बार भी नए मोहरे उछलने लगे हैं। पिछले सात महीनों में चार नए दलों का गठन हो चुका है, जो विधानसभा चुनाव में दांव आजमाएंगे।
जातीय और क्षेत्रीय आधार पर दलों के बनने-बिगड़ने की परंपरा प्राय: हर चुनाव में रही है, लेकिन इस बार जोर-जोश कुछ अधिक ही है। ऐसा तब जबकि इक्का-दुक्का उदाहरण को छोड़ शेष प्रयोग बहुत सफल नहीं रहे। बहरहाल नवगठित दलों में एकमात्र जन सुराज पार्टी (जसुपा) ही तनिक दमदार प्रतीत हो रही।
4 सीटों पर उपचुनाव में मिले 10 प्रतिशत वोटविधानसभा की चार सीटों पर हुए उपचुनाव में 10 प्रतिशत मत पाकर उसने इसका आभास भी कराया है। उससे पहले रूपौली के उपचुनाव में निर्दलीय शंकर प्रसाद की जीत में उसकी रणनीति का बड़ा योगदान रहा है। शेष तीनों दल (आसा, हिंद सेना और आईआईपी) भी उसी की तरह प्रभावी हों, इस पर संशय है।
2020 में 0.3 प्रतिशत वोट पाने वाली पुष्पम प्रिया की प्लूरल्स पार्टी इसका प्रमाण है। वह जिन 102 सीटों पर मैदान में थी, उनमें से मात्र तीन में तीसरे स्थान पर रही। तब 212 पार्टियां मैदान मेंं थीं। आमने-सामने के गठबंधन (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और महागठबंधन) को 74.49 प्रतिशत मत के साथ 235 सीटें मिली थीं।
पान के कारोबार और कताई-बुनाई के काम से जुड़े तांती-ततवा समाज में अपना भविष्य देख रही इंडियन इन्किलाब पार्टी (आईआईपी) का प्रभाव अनिश्चित है। इक्का-दुक्का सीटों पर आईआईपी समाज विशेष के दृष्टिकोण को थोड़ा-बहुत प्रभावित कर सकती है, क्योंकि आधार जनसंख्या 18-20 लाख से अधिक नहीं।
लांडे पर बाहरी का ठप्पाहिंद सेना का गठन करने वाले महाराष्ट्र के मूल निवासी शिवदीप लांडे (Shivdeep Lande) पर तो पहले से ही बाहरी का ठप्पा लगा हुआ है। बचे आरसीपी सिंह के लिए 2005 का दृष्टांत उचित होगा। तब रामविलास पासवान के साथ मिलकर रंजन यादव ने राजद को काफी नुकसान पहुंचाया था।
उससे पहले तक वे लालू के विश्वस्तों में हुआ करते थे। संभव है कि आरसीपी सिंह भी जदयू के लिए ऐसी मंशा रखते हों, लेकिन इसके लिए उन्हें विरोधी गठबंधन के साथ समन्वय बनाना होगा। उसकी संभावना नहीं के बराबर है।
नई चौकड़ीजसुपा: 02 अक्टूबर, 2024 को चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने जसुपा का गठन किया। पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी और जनसंख्या के अनुपात में विभिन्न समाज-वर्ग को टिकट मिलना है।
आसा: पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने 31 अक्टूबर, 2024 को आसा का गठन किया। 140 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है। सात प्रतिशत की जनसंख्या वाले कुर्मी-कुशवाहा का आसरा है।
हिंद सेना: सितंबर, 2024 में शिवदीप वामनराव लांडे ने आईजी के पद से त्यागपत्र दिया था। 08 अप्रैल, 2025 को उन्होंने हिंद सेना के गठन की घोषणा की। पार्टी सभी सीटों पर लड़ेगी और लांडे भी प्रत्याशी होंगे।
आईआईपी: कांग्रेस से त्यागपत्र देकर अखिल भारतीय पान महासंघ के अध्यक्ष इंजीनियर आईपी गुप्ता ने 13 अप्रैल को आईआईपी का गठन किया। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।
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क्या है 'Waqf By User' संपत्ति, जिसका कोर्टरूम में बार-बार जिक्र करते रहे सिंघवी?
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वक्फ कानून (Waqf Law) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आज करीब दो घंटे तक सुनवाई चली। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी सरीखे वकीलों ने इस कानून के खिलाफ कई दलीलें दी। वहीं, अभिषेक मनु सिंघवी लगातार 'वक्फ बाय यूजर' संपत्ति का जिक्र कर रहे थे।
अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील दी कि देशभर में 8 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से आधी यानी 4 लाख से अधिक प्रॉपर्टी ‘वक्फ बाई यूजर’ के तौर पर रजिस्टर है। सिंघवी ने आगे दलील दी और इस बात को लेकर चिंता जताई कि वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद इन संपत्तियों पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
अब ये जान लेते हैं कि आखिर ये 'वक्फ बाई यूजर' का मतलब क्या है, जिसका जिक्र सिंघवी बार-बार कोर्ट रूम में कर रहे थे?
दरअसल, 'Waqf By User' एक परंपरा है, जिसमें कोई संपत्ति लंबे समय तक इस्लामिक धार्मिक या परोपकारी उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त होने के कारण वक्फ मानी जाती है, भले ही उसके पास लिखित दस्तावेज या रजिस्ट्री न हो।
कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार ने क्लॉज के साथ छेड़छाड़ क्यों की?
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा,‘वक्फ बाय यूजर’ वक्फ की एक शर्त है। इसको ऐसे समझिए कि मेरे पास एक प्रॉपर्टी है और मैं चाहता हूं कि वहां एक अनाथालय बनवाया जाए, तो इसमें समस्या क्या है? मेरी जमीन है, मैं उस पर बनवाना चाहता हूं, ऐसे में सरकार मुझे रजिस्टर्ड कराने के लिए क्यों कहेगी? इस पर सीजेआई ने कहा, अगर आप वक्फ का रजिस्ट्रेशन कराएंगे तो रिकार्ड रखना आसान होगा।
'फर्जी दावों से बचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी'कपिल सिब्बल और सिंघवी की दलीलों पर जस्टिस विश्वनाथन ने जवाब दिया,"कानून के मुताबिक, फर्जी दावों से बचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। इसलिए वक्फ डीड बनवाना होगा।
इस पर सिब्बल ने तर्क दिया। उन्होंने कहा, यह इतना आसान नहीं है। वक्फ सैकड़ों साल पहले बनाए गए थे। सरकार 300 साल पुरानी संपत्ति की वक्फ डीड मांगेगी। आखिर लोग कहां से लाएंगे। यही समस्या है। बता दें कि गुरुवार को ‘वक्फ बाय यूजर’ पर ही सुनवाई होगी, जिसमें सरकार की ओर से दलील पेश की जाएंगी।
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US Vice President JD Vance announces visit to India, to meet PM Modi on April 21 - Hindustan Times
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Waqf Law: 'सैकड़ों साल पुरानी मस्जिदों...' सिब्बल-सिंघवी की दलीलों पर क्या बोले CJI? पढ़ें सुनवाई डे-1 में क्या-क्या हुआ
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वक्फ कानून (Waqf Law) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज (16 अप्रैल) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। देश के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही है। बता दें कि वक्फ कानून के खिलाफ करीब 70 याचिकाओं पर अदालत सुनवाई कर रही है।
एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, सहित अन्य याचिकाकर्ता के वकील कोर्ट में उपस्थित थे। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता पैरवी कर रहे हैं। कोर्ट अब अगली सुनवाई गुरुवार दोपहर 2 बजे करेगा।
वक्फ कानून के मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने क्या-क्या बड़ी बातें कही?सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा, "केवल मुस्लिम ही बोर्ड का हिस्सा हो सकते थे। अब हिंदू भी इसका हिस्सा होंगे। यह अधिकारों का हनन है। आर्टिकल 26 कहता है कि सभी मेंबर्स मुस्लिम होंगे। यहां 22 में से 10 मुस्लिम हैं। अब कानून लागू होने के बाद से बिना वक्फ डीड के कोई वक्फ नहीं बनाया जा सकता है।
सिब्बल की इस टिप्पणी पर CJI जस्टिस खन्ना ने कहा,"इसमें क्या समस्या है? जस्टिस कुमार ने कहा, 'हमें उदाहरण दीजिए। क्या तिरुपति बोर्ड में भी गैर-हिंदू हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा," क्या वह मुसलमानों को हिंदू धार्मिक ट्रस्टों का हिस्सा बनने की अनुमति देने को तैयार है। हिंदुओं के दान कानून के मुताबिक, कोई भी बाहरी बोर्ड का हिस्सा नहीं हो सकता है। वक्फ प्रॉपर्टी है या नहीं है, इसका फैसला अदालत को क्यों नहीं करने देते।"
14वीं और 16वीं शताब्दी की मस्जिद कहां से दिखाएंगे दस्तावेज: कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बाई यूजर के प्रावधान पर भी सवाल किया। CJI खन्ना ने कहा कि कई पुरानी मस्जिदें हैं। 14वीं और 16वीं शताब्दी की मस्जिदें है, जिनके पास रजिस्ट्रेशन सेल डीड नहीं होगी। सीजेआई ने केंद्र से पूछा कि ऐसी संपत्तियों को कैसे रजिस्टर किया जाएगा? उनके पास क्या दस्तावेज होंगे? ऐसे वक्फ को खारिज कर देने पर विवाद ज्यादा लंबा चलेगा।
हम यह जानते हैं कि पुराने कानून का कुछ गलत इस्तेमाल हुआ, लेकिन कुछ वास्तविक वक्फ संपत्तियां हैं, जिनकी इस्तेमाल के दौरान लंबे समय से वक्फ संपत्ति के तौर पर पहचान हुई। वक्फ बाई यूजर मान्य किया गया है, अगर आप इसे खत्म करते हैं तो समस्या होगी।
आर्टिकल 26 सभी धर्मों पर लागू होता है: कोर्ट
सुनवाई के दौरान जब कपिल सिब्बल ने आर्टिकल 26 यानी धर्मनिरपेक्ष की बात कही तो सीजेआई ने कहा कि आर्टिकल 26 धर्मनिरपेक्ष, यह सभी कम्युनिटी पर लागू होता है। हिंदुओं के मामले में भी सरकार ने कानून बनाया है। संसद ने मुस्लिमों के लिए भी कानून बनाया है। आर्टिकल 26 धर्मनिरपेक्ष है। यह सभी कम्युनिटी पर लागू होता है।
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा, हम उस प्रावधान को चुनौती देते हैं, जिसमें कहा गया है कि केवल मुसलमान ही वक्फ बना सकते हैं।
सरकार कैसे कह सकती है कि केवल वे लोग ही वक्फ बना सकते हैं जो पिछले 5 सालों से इस्लाम को मान रहे हैं? इतना ही नहीं राज्य कैसे तय कर सकता है कि मैं मुसलमान हूं या नहीं और इसलिए वक्फ बनाने के योग्य हूं?' वक्फ सैकड़ों साल पहले बनाया गया है। अब ये 300 साल पुरानी संपत्ति की वक्फ डीड मांगेंगे। यह एक परेशानी है।
सिब्बल की टिप्पणियों पर क्या बोले सॉलिसिटर जनरल?सिब्बल के इन सवालों पर केंद्र की ओर से SG तुषार मेहता ने कहा,"वक्फ का रजिस्ट्रेशन हमेशा अनिवार्य रहेगा। 1995 के कानून में भी ये जरूरी था। सिब्बल साहब कह रहे हैं कि मुतवल्ली को जेल जाना पड़ेगा। अगर वक्फ का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो वह जेल जाएगा। यह नियम 1995 से लागू है।
अदालत ने वक्फ बाई यूजर के प्रावधान पर भी सवाल किया। CJI खन्ना ने कहा कि कई पुरानी मस्जिदें हैं। 14वीं और 16वीं शताब्दी की मस्जिद है, जिनके पास रजिस्ट्रेशन सेल डीड नहीं होगी। सीजेआई ने केंद्र से पूछा कि ऐसी संपत्तियों को कैसे रजिस्टर करेंगे? उनके पास क्या दस्तावेज होंगे? ऐसे वक्फ को खारिज कर देने पर विवाद ज्यादा लंबा चलेगा।
सीजेआई ने आगे कहा,"हम यह जानते हैं कि पुराने कानून का कुछ गलत इस्तेमाल हुआ, लेकिन कुछ वास्तविक वक्फ संपत्तियां हैं, जिनकी इस्तेमाल के दौरान लंबे समय से वक्फ संपत्ति के तौर पर पहचान हुई। वक्फ बाई यूजर मान्य किया गया है, अगर आप इसे खत्म करते हैं तो समस्या होगी।"
यह भी पढ़ें: 'सरकार कैसे तय करेगी मैं मुस्लिम हूं या नहीं', वक्फ कानून के खिलाफ सिब्बल रख रहे SC में दलील
Bihar: 10वीं के फर्जी प्रमाण पत्र पर पास की BPSC परीक्षा, नौकरी मिलते ही अवैध संपत्ति बनाने में जुटे
राज्य ब्यूरो, पटना। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी लड़ाई में बुधवार को विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने सुपौल के तत्कालीन निलंबित अंचलाधिकारी (सीओ) प्रिंस राज के दो ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। छापेमारी के दौरान इनके ठिकानों से अकूत चल-अचल संपत्ति बरामद की गई है। अपने छह वर्ष के सेवा काल में प्रिंस राज ने आय से करीब 93 प्रतिशत ज्यादा अवैध संपत्ति अर्जित की है।
यहीं नहीं छापामारी में यह प्रमाण भी मिले हैं कि इन्होंने फर्जी मैट्रिक परीक्षा प्रमाण पत्र बनवाया, चार साल उम्र घटाई और इसी के आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा तक पास की।
मधुबनी और शेखपुरा में एक साथ मारा छापाप्रिंस राज निलंबन के बाद फिलहाल कोसी प्रमंडल में प्रतिनियुक्ति पर हैं। इनके बारे में एसवीयू को प्रमाण मिले थे कि पद का दुरुपयोग कर इन्होंने अकूत संपत्ति अर्जित की है। जिसके बाद इनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद एसवीयू की टीम ने बुधवार की सुबह इनके मधुबनी और शेखपुरा के ठिकानों पर एक साथ छापा मारा।
छापेमारी में यह जानकारी मिली है कि इन्होंने विभिन्न पदस्थापन के दौरान काफी काली कमाई की। छापामारी में कई आवासीय मकान, फ्लैट, विभिन्न बैंकों में प्रिंस राज और उनकी पत्नी के नाम के बैंक खाते, फिक्स डिपाजिट में निवेश के प्रमाण के साथ ही लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात बरामद किए गए हैं।
आरोपित की पत्नी अंकु गुप्ता के नाम बैंक ऑफ इंडिया हजारीबाग में एक लाकर की जानकारी भी प्राप्त हुई है। अब तक की कार्रवाई में मिली संपत्ति इनकी वर्णित आय की तुलना में कई गुना अधिक है।
अब तक बरामद संपत्ति- प्रिंस राज का आवासीय घर, चंडी चौक, खिरहर, बेनीपट्टी, मधुबनी
- पत्नी अंकु गुप्ता का आवासीय परिसर, अरियरी, शेखपुरा बाजार
- आवासीय परिसर, दीपगढ़ा, सदर, हजारीबाग
- निर्माणाधीन आवासीय परिसर, रेलवे स्टेशन के पास मधुबनी
- विभिन्न बैंकों में प्रिंस राज और उनकी पत्नी के नाम के बैंक खाते
- फिक्स डिपाजिट में निवेश के प्रमाण व लाखों के सोने-चांदी के जेवरात
- हजारीबाग में पत्नी के नाम एक बैंक लाकर के प्रमाण भी मिले
विशेष निगरानी के अनुसार छापामारी के दौरान प्रिंस राज के बारे में यह जानकारी सामने आई कि इन्होने धर्मेद्र कुमार के नाम पर मैट्रिक की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास की थी। जिस वजह से यह आइटीआइ प्रवेश के लिए मान्य नहीं थे।
फिर आरोपित ने अपना प्रिंस राज के नाम से दूसरा फर्जी प्रमाण पत्र बनाया और इसका उपयोग कर बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की। अभियुक्त ने जन्म तिथि में भी हेरफेर की और चार साल का लाभ भी लिया। जिसकी जांच अलग से होगी। विशेष निगरानी इकाई ने इन्हें एक भ्रष्ट अधिकारी बताया है।
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कैब ड्राइर ने बीच सड़क पर रोक दी कार... बेंगलुरु में आधी रात को युवती के साथ ये कैसी हरकत!
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के कौन-कौन से शहर महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील हैं, इस पर विस्तृत बहस की जा सकती है। लेकिन आए दिन सामने आ रहे मामलों ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है।
ताजा मामला एक टेक फर्म में काम करने वाली युवती के साथ सामने आया है। दरअसल सोशल मीडिया साइट एक्स पर श्रविका जैन नामक युवती ने बेंगलुरु में देर रात अपने साथ हुआ वाकया शेयर किया है। इसके बाद से ही ये पोस्ट काफी वायरल हो गया।
तेज आवाज में बजा रहा था गानाश्रविका ने बताया कि 'लोग पूछते हैं कि क्या बेंगलुरु सुरक्षित है। पिछली रात मैं एयरपोर्ट से कैब कर अपने घर लौट रही थी। लेकिन ये मेरी जिंदगी का सबसे भयानक अनुभव था। ड्राइवर ने कैब ड्राइव करने के साथ ही मुझे घूरना शुरू कर दिया था।'
श्रविका ने लिखा, 'उसने मुझसे पूछा कि क्या मैं कन्नड़ जानती हू्ं। इसके बाद उसने यूट्यूब पर काफी तेज आवाज में गाने बजाने शुरू कर दिए। वह अपनी जांघों को थपथपाते हुए चिल्ला-चिल्लाकर गा रहा था।'
कैब में सिगरेट पीने लगा ड्राइवर- श्रविका ने कहा कि 'जब मैंने उससे आवाज धीमी करने को कहा, तो उसने मुझे घूरा और बिल्कुल हल्की सी आवाज कम की। उसने कैब के अंदर ही सिगरेट पीना शुरू कर दिया और मेरे मना करने पर भी नहीं माना। उसने अचानक कार बीच में ही रोक दी और कहा कि मुझे चाय पीनी है।'
- युवती ने कहा कि जब मैंने पहले घर छोड़ने के लिए कहा, तो भी वह तुरंत कार से नीचे उतर गया और 10 मिनट बाद लौटा। इसके बाद भी वह रास्ते भर मुझे घूरता रहा। मैं काफी डर गई थी, लेकिन शुक्र है कि मैं घर पहुंच गई।
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Waqf Law: 'मैंने तो सुना है कि संसद भी...', कोर्टरूम में सिंघवी ने दलील देते हुए मजाकिया अंदाज में ये क्या कह दिया ?
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वक्फ कानून (Waqf Law) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज (16 अप्रैल) सुनवाई हुई। कोर्ट में तकरीबन दो घंटे से ज्यादा समय तक इस मामले पर बहस चली।
देश के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच इस मामले पर सुनवाई कर रही है। वक्फ कानून के खिलाफ करीब 70 याचिकाओं पर अदालत सुनवाई कर रही है। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वरिष्ठ वकीलों ने नए कानून को लेकर कोर्ट में सवाल खड़े किए।
आइए पढ़ें कि कोर्टरूम में सिंघवी ने नए कानून के खिलाफ क्या-क्या दलीलें दी?अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील दी कि देशभर में 8 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से आधी यानी 4 लाख से अधिक प्रॉपर्टी ‘वक्फ बाई यूजर’ के तौर पर रजिस्ट्रर है। सिंघवी ने आगे दलील दी और इस बात को लेकर चिंता जताई कि वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद इन संपत्तियों पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
क्या है 'वक्फ बाई यूजर' का मतलब?यह वह परंपरा है जिसमें कोई संपत्ति लंबे समय तक इस्लामिक धार्मिक या परोपकारी उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त होने के कारण वक्फ मानी जाती है, भले ही उसके पास लिखित दस्तावेज या रजिस्ट्री न हो।
वक्फ संशोधन को लागू नहीं किया जाना चाहिए: सिंघवीसुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान सिंघवी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें यह तक सुनने में आया है कि संसद भवन की जमीन भी वक्फ की है। उन्होंने कोर्ट से पूछा कि क्या अयोध्या केस में जो फैसले लिए गए, वे इस मामले में लागू नहीं होते? उन्होंने संशोधित वक्फ अधिनियम पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की और कहा कि जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक संशोधन लागू नहीं किया जाना चाहिए।
अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा,"यह केस इसका नहीं कि किस-किस याचिका को हाईकोर्ट भेजा जाए। नए कानून के प्रावधान तत्काल की प्रभावी हो गए हैं। इन पर स्टे लगाया जाना चाहिए।"
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